अगर रावण की लंका असली थी, तो श्रीलंका में क्यों नहीं मिलती? जानिए क्या कहते हैं इतिहासकार और वैज्ञानिक

 

अगर रावण की लंका असली थी, तो श्रीलंका में क्यों नहीं मिलती? जानिए क्या कहते हैं इतिहासकार और वैज्ञानिक

क्या रावण की लंका वास्तव में मौजूद थी?
अगर हाँ, तो आज श्रीलंका में उसका कोई स्पष्ट पुरातात्विक प्रमाण क्यों नहीं मिलता?
यह सवाल रामायण प्रेमियों, शोधकर्ताओं और आम लोगों के बीच लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है।

नए शोध, भूगोल और पुराण विशेषज्ञ बताते हैं कि रावण की लंका और आज का श्रीलंका — दोनों जरूरी नहीं कि एक ही स्थान हों। आइए समझते हैं कारण।


📌 रामायण की लंका कहाँ थी? श्रीलंका ही क्यों माना जाता है?

वाल्मीकि रामायण में लंका एक समृद्ध, स्वर्ण-नगरी के रूप में वर्णित है।
समुद्र के उस पार एक सोने की चमचमाती नगरी — इसलिए कई विद्वान इसे आज के श्रीलंका से जोड़ते हैं।

लेकिन श्रीलंका में कहीं भी सोने की प्राचीन नगरी या रावणकालीन स्थापत्य का कोई प्रमाण नहीं मिलता।

यही वजह है कि अब शोधकर्ता अन्य संभावनाओं की तरफ भी ध्यान दे रहे हैं।


📌 1. रामायण काल की लंका श्रीलंका नहीं, समुद्र में डूबा कोई अन्य द्वीप हो सकता है

इतिहासकारों का दावा है कि रामायण काल लगभग 8,000–10,000 साल पुराना है।
इस दौरान:

  • समुद्र का स्तर कई बार बढ़ा
  • बड़े द्वीप जलमग्न हो गए
  • महाद्वीपीय शिफ्टिंग हुई

संभव है कि रावण की असल लंका आज हिंद महासागर में कहीं समुद्र के नीचे हो।


📌 2. समुद्र-स्तर बढ़ने से प्राचीन तटीय नगर गायब हो गए

पिछले हजारों वर्षों में समुद्र का स्तर 120 मीटर तक बढ़ा है।
ऐसे में:

  • तटीय नगर
  • द्वीप
  • बंदरगाह
    सब समुद्र में समा सकते हैं।

रावण की लंका भी समय के साथ पूरी तरह जलमग्न हो गई होगी।


📌 3. “सोने की लंका” का वर्णन प्रतीकात्मक भी हो सकता है

रामायण में लंका को “स्वर्ण-मयी” कहा गया है।
कुछ विद्वानों के अनुसार:

  • इसका मतलब समृद्धि है
  • असली संरचनाएँ लकड़ी, धातु या पत्थर की रही होंगी
  • समय के साथ ये सभी नष्ट हो चुकी होंगी

इसलिए आज उनके अवशेष मिलना लगभग असंभव है।


📌 4. 10,000+ साल पुरानी सभ्यता के प्रमाण मिलना आसान नहीं

इतने पुराने समय की संरचनाएँ:

  • भूकंप
  • ज्वालामुखी
  • समुद्री क्षरण
  • मिट्टी और चट्टानों के बदलाव

की वजह से पूरी तरह नष्ट या दबी हो सकती हैं।

इस कारण रावणकालीन लंका का पुरातात्विक रूप में न मिलना स्वाभाविक है।


📌 5. श्रीलंका में रामायण से जुड़े धार्मिक स्थल तो हैं… लेकिन प्रमाण नहीं

श्रीलंका में कई जगहें रामायण से जुड़ी मानी जाती हैं:

  • अशोक वाटिका – नुवारा एलिया
  • रावण एला गुफा – एला
  • सिगिरिया किला – जिसे कुछ लोग रावण का महल बताते हैं

लेकिन ये सांस्कृतिक मान्यताएँ हैं, पुरातात्विक प्रमाण नहीं।


📌 6. रावण की सभ्यता तकनीकी रूप से उन्नत थी — प्रमाण समय के साथ मिट सकते हैं

रामायण में वर्णन मिलता है:

  • पुश्पक विमान
  • सोने के महल
  • उन्नत शिल्प और विज्ञान

यदि रावण की सभ्यता असाधारण थी, तो उसके निर्माण में उपयोग हुए पदार्थ आज की पुरातत्व तकनीकों से पहचान में नहीं आ रहे


🔍 निष्कर्ष: रावण की लंका श्रीलंका में क्यों नहीं मिलती?

👉 क्योंकि पुरानी लंका शायद किसी और स्थान पर थी, संभवतः समुद्र के नीचे।
👉 या फिर समुद्र-स्तर बढ़ने और समय के प्रभाव से उसके सभी अवशेष पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं।
👉 श्रीलंका रामायण की स्मृतियों से जुड़ा ज़रूर है, लेकिन इसे रावण की असली नगरी कहना अभी वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं है।