प्लास्टिक के बर्तनों में न खाएं और न ही गर्म करें खाना — क्यों है यह इतना ख़तरनाक?
आज की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में प्लास्टिक हमारे जीवन का लगभग अविभाज्य हिस्सा बन चुका है। घरों, दुकानों, रेस्तरां और ऑफिस कैफेटेरिया में खाना पैक करने से लेकर पानी पीने तक में इसका उपयोग साधारण बात हो चुकी है। अधिकांश लोग प्लास्टिक को सुविधाजनक, हल्का और सस्ता मानकर इसका निरंतर इस्तेमाल करते हैं। लेकिन वैज्ञानिक अध्ययनों ने पिछले कुछ वर्षों में यह स्पष्ट कर दिया है कि प्लास्टिक की यह सुविधा हमारी सेहत पर भारी पड़ सकती है—विशेष रूप से तब, जब हम प्लास्टिक के बर्तनों में गर्म भोजन रखते हैं या भोजन को माइक्रोवेव में गर्म करते हैं।
समाचार-लेख में भी यही चेतावनी दी गई है कि प्लास्टिक के बर्तनों में न खाना चाहिए और न ही उसमें खाना गर्म करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक जैसी हानिकारक सूक्ष्म कण हमारे भोजन में मिलकर शरीर में जा सकते हैं। यह कण आकार में इतने छोटे होते हैं कि नंगी आँखों से दिखाई भी नहीं देते, लेकिन ये धीरे-धीरे हमारे शरीर के अधिकांश अंगों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।
गर्म खाना और प्लास्टिक: सबसे ख़तरनाक मेल
कई शोध बताते हैं कि जब प्लास्टिक का संपर्क गर्म चीज़ों से होता है, तो उसके अंदर मौजूद रासायनिक पदार्थ टूटकर भोजन या पेय पदार्थ में घुलने लगते हैं। विशेष रूप से यह खतरा तब बढ़ जाता है जब:
- गर्म भोजन सीधे प्लास्टिक के डिब्बे में डाला जाए
- माइक्रोवेव में खाना प्लास्टिक के कंटेनर में गर्म किया जाए
- प्लास्टिक बोतलों में गर्म पानी रखा जाए
- सूर्य की गर्मी में रखा प्लास्टिक नरम होकर भोजन के संपर्क में आए
इन परिस्थितियों में BPA (Bisphenol A), फ्थेलेट्स (Phthalates) और सैकड़ों अन्य रसायन भोजन में निकल सकते हैं।
ये रसायन हार्मोनल असंतुलन, शुक्राणुओं की गुणवत्ता में गिरावट, बांझपन, थायरॉइड की समस्याओं, हृदय रोग, मोटापा, और कैंसर तक का खतरा बढ़ा सकते हैं। शोधकर्ता यह भी मानते हैं कि प्लास्टिक में मौजूद रसायन एंडोक्राइन डिसरप्टर्स की तरह काम करते हैं—यानी वे शरीर में प्राकृतिक हार्मोनों की नकल करते हैं और पूरे हार्मोन सिस्टम को गड़बड़ा सकते हैं।
माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक: धीमा ज़हर
प्लास्टिक पूरी तरह नष्ट नहीं होता। वह छोटे-छोटे कणों में टूटता रहता है जिन्हें माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक कहा जाता है। ये कण:
- हवा में फैलते हैं
- पानी और खाद्य पदार्थों में घुलते हैं
- मानव रक्त, फेफड़ों, गर्भनाल और दिमाग तक में पाए जा चुके हैं
शोधों के अनुसार औसत व्यक्ति एक सप्ताह में लगभग एक क्रेडिट कार्ड जितना प्लास्टिक अपने शरीर में समा लेता है। यह एक अत्यंत चिंताजनक तथ्य है क्योंकि इन कणों को बाहर निकालने की शरीर की क्षमता बेहद सीमित है।
प्लास्टिक के बर्तनों में खाना गर्म करने से माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा कई गुना बढ़ सकती है। लेख में बताया गया है कि माइक्रोवेव में प्लास्टिक का उपयोग विशेष रूप से खतरनाक हो सकता है क्योंकि गर्मी प्लास्टिक को अस्थिर बनाती है और रसायनों के रिसाव को तेज़ करती है।
क्यों विश्व स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं?
दुनिया भर के वैज्ञानिक संगठनों, जैसे—विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), यूनाइटेड नेशन्स एनवायरनमेंट प्रोग्राम (UNEP) और अनेक मेडिकल शोध संस्थानों ने प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग और उसके स्वास्थ्य प्रभावों पर चिंता व्यक्त की है। कई रिपोर्टें बताती हैं कि प्लास्टिक का शरीर में जमा होना क्रॉनिक सूजन, प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर, और स्नायु तंत्र पर प्रभाव डाल सकता है।
इसके अलावा, गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और बुजुर्गों पर इसका प्रभाव और भी गंभीर हो सकता है। गर्भ में पल रहे शिशुओं पर प्लास्टिक रसायनों का असर उनके मस्तिष्क विकास और भविष्य की स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़ा गया है।
प्लास्टिक प्रदूषण का बड़ा कारण—कुछ गिनी-चुनी कंपनियाँ
समाचार में उल्लेखित जानकारी के अनुसार, दुनिया की लगभग आधी प्लास्टिक प्रदूषण की ज़िम्मेदारी सिर्फ 60 कंपनियों पर है। ये कंपनियाँ पेट्रोलियम और रासायनिक उद्योग से जुड़ी हैं, जो सस्ते और बड़े पैमाने पर प्लास्टिक का उत्पादन करती हैं। इनके द्वारा बनाए जाने वाले उत्पाद दुनिया भर में फैलते हैं और अंततः पर्यावरण में कचरे के रूप में मौजूद रहते हैं।
इसका मतलब यह है कि समस्या केवल उपभोक्ता स्तर की नहीं, बल्कि औद्योगिक और नीतिगत स्तर पर भी गहरी है। यदि प्लास्टिक उत्पादन पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो प्रदूषण और स्वास्थ्य समस्याएँ भविष्य में और बढ़ सकती हैं।
आप क्या कर सकते हैं? सुरक्षित विकल्प
हालाँकि प्लास्टिक पूरी तरह छोड़ना संभव नहीं लगता, लेकिन कुछ छोटे-छोटे कदम स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए फायदेमंद हो सकते हैं:
1. गर्म भोजन कभी भी प्लास्टिक में न रखें
चाहे प्लास्टिक कंटेनर “माइक्रोवेव-सेफ” क्यों न लिखा हो, गर्मी में रसायन रिसने की संभावना रहती है।
2. काँच और स्टील के बर्तन उपयोग करें
भोजन को स्टोर या गर्म करने के लिए ग्लास कंटेनर सबसे सुरक्षित माने जाते हैं। स्टेनलेस स्टील भी एक बढ़िया विकल्प है।
3. माइक्रोवेव में केवल ग्लास कंटेनर का उपयोग करें
प्लास्टिक को माइक्रोवेव में गर्म करने से बचें।
4. प्लास्टिक की बोतलों में गर्म पानी न डालें
बोतल नरम होकर हानिकारक पदार्थ छोड़ने लगती है।
5. प्लास्टिक को धूप में न छोड़ें
धूप और गर्मी प्लास्टिक को तेजी से खराब करती है, जिससे उसमें से रसायन निकलने लगते हैं।
6. “BPA-free” लेबल पर पूरी तरह भरोसा न करें
ऐसे उत्पादों में BPA की जगह समान रूप से हानिकारक रसायन उपयोग किए जा सकते हैं।
यह स्पष्ट है कि प्लास्टिक हमारे शरीर और पर्यावरण दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। सुविधा के कारण हम इसे रोज़मर्रा के जीवन में इस्तेमाल करते रहें, लेकिन इसकी अदृश्य और धीमी हानियाँ आने वाले वर्षों में गंभीर स्वास्थ्य संकट बन सकती हैं। लेख में दी गई चेतावनी बिल्कुल वैज्ञानिक आधार पर है—गर्म खाना और प्लास्टिक का मिलना हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है, इसलिए बेहतर है कि हम अपने दैनिक जीवन में ऐसे फैसले लें जो सुरक्षित और टिकाऊ हों।
